नमस्कार दोस्तों मेरा नाम महेंद्र है और एक्सप्लोर करने आ गया बीकानेर में, घूमेंगे यहां की प्लेसेस, क्या बजट होगा आपका यहां ये सारी जानकारी मै आपको दूंगा।
बीकानेर बसा है राजस्थान में और यहां पर कई राज्य से डायरेक्ट ट्रेन यहां आती है बहुत सारे सिटीज सभी बसे यहां आती है वैसे यहां एयरपोर्ट भी है लेकिन आपको केवल दिल्ली और जयपुर से ही मिल सकती है।
जैसा कि मैं बताता हु घूमने का मज़ा तभी है जब आपकी मर्जी हो यानी कि जहां आपका मन करे वहां रुके, जहां मन न करे वहां न रुके तो इसके लिए आपके पास बाइक होनी चाहिए। सुबह ही सुबह मै निकल पड़ा रेंट पर बाइक लेने। बाइक मुझे मिली ₹400 रुपए दिन के हिसाब से।
वैसे बीकानेर में स्कूटी आस पास ही है इसलिए आपको स्कूटी हायर कर लेना चाहिए। सबसे पहले मै बाइक से जूनागढ़ फोर्ट देखने गया। लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए यहां की मार्केट से होकर गुजरना होगा। जहां मिलता है पूरा बीकानेरी फील छोटी छोटी दुकानें बड़ी बड़ी दुकानें देखकर लगेगा नहीं ये हमने पहले भी कभी देखा है सचमे एक बार इस मार्केट में जरूर जाएं।
जूनागढ़ फोर्ट बिल्कुल सीटी में ही है और रेलवे स्टेशन से 2 किलोमीटर की डिस्टेंस पर ही है यहां पर मैने देखा बहुत सारे गेट है लेकिन मैं समझ नहीं पाया कि किस लिए लेकिन एक भाई से पूछा तो उसने बताया कि पहले के जमाने में सैनिक तो ढेर सारे होते थे अचानक हमला कर सकते है उनसे बचने के लिए यानिकि एक साथ हमला न कर सके धीरे धीरे अंदर की बड़े इसी लिए इतनी सारी गेट बनी है।
बीकानेर काफी बड़े एरिया में है यहां इंटर करते ही सबसे पहले यहां की देवी कार्निमाता की प्रतिमा देखने को मिली साथ में गणेश जी की भी बाहर से देखने पर उदयपुर का सिटी पैलेस जैसा दिखता है बस रंग अलग है गुनगढ़ के किले का निर्माण राजा राय सिंह ने 1589 में करवाया था और 1902 तक बीस अलग अलग रूरल ने राज किया। अलग अलग राजाओं ने अलग अलग निर्माण भी कराए लेकिन इस महल से पहले ही बीकानेर शहर बस चुका था जिसकी इंटरेस्टिंग स्टोरी हमे लोकल की जरिए पता चली।
यहां पर बहुत सारे सेक्शन है जोकि मैने पहले देखा बड़ा सा प्लेन और डोलियां देखने को मिलती है राजस्थान की पहली लिफ्ट भी यहीं लगाई गई थी और इलेक्ट्रिसिटी सबसे पहले बीकानेर शहर में ही आई थी पुराना बीकानेर शहर कैसा दिखता था ये भी आप यहां देख पाएंगे और महल में गार्डन भी है और जेल भी और किले को बनाने में उस्ता कला का उपयोग किया गया था और हथियारों का अच्छा खासा व्यू देखने को मिलेगा। पूरा महल घूमने में आपको दो से तीन घंटे लग जाएंगे।
यहां के जूनागढ़ में इतिहास कूट कूटकर भरा पड़ा है जैसे ही आप इंट्री करते है तो आपको महाराजा का प्लेन देखने को मिलता है फिर आप उसके और अंदर जाते है तो आपको ऐसे ऐसे दस्तावेज दिखाई देते है जो उनको गिफ्ट में मिले थे और अंदर बंदूकों वाला कमरा मेरा फेवरेट बन गया 12 फिट की बंदूकें थी फिर उसके आगे बढ़ते है तो मंदिर भी है और वहीं पर महाराजा का शयन कक्ष भी है जब आप घूमने आते है तो गुनगढ को आप कभी भूल नहीं पाएंगे और यहां की इंट्री फीस ₹150 रुपए है।
वैसे बीकानेर में घुमाने से ज्यादा खाने पीने का ट्रेंड है सुबह होते ही लोग सबसे पहले पहुंचते है चाय पट्टी और यही की मैने कचौड़ी खाई भाई मजा आ गया आप लोग यहां आए तो जरूर यहां की कचौड़ी ट्राई करे चाय पट्टी में और भी फेमस है जैसे लस्सी।
बीकानेर में ही नहीं बल्कि पूरे राजस्थान में कार्निमाता को माना जाता है और मै उसी माता के मंदिर में जा रहा हूं अभी तो मैं स्कूटी से हु वहां किस समय जा सकते है कहां से कितना टाइम लगेगा और बस से कैसे जा सकते है ये भी बताऊंगा? और ये वही मंदिर है जाना ढेर सारे चूहे भी देखने को मिलते है।
बस आपको बीकानेर में बस स्टैंड से 40 रूपये में ही मिल जाते है करनी माता का मंदिर मेन बीकानेर से 30 किलोमीटर की दूरी पर है जिसके रस्ते हाइवे के है लगभग मै 30 मिनट में करनिमाता के मंदिर पहुंच गया मंदिर बहुत बड़े एरिया में बना है यहां पर होटल भी बड़े बड़े देखने को मिला साथ ही यहां पर पार्किंग भी अच्छी खासी है।
करनी माता के मंदिर में नॉर्मल दिनों में ज्यादा भीड़ देखने कोमुख्य मंदिर में प्रवेश के बाद नहीं मिलती गेट से इंट्री करते ही ढेरों चूहे देखने को मिलते है माता के दर्शन दूर से ही होते है उनके आस पास भी चूहे देखने को मिल जाएंगे।
यहां पर ऐसा माना जाता है कि करनिमाता के भक्त मरने के बाद चूहों के रूप में यहां जन्म लेती है और अगला जन्म इंसान के रूप में होता है इन चूहों को यहां पर काबा कहते है सफेद चूहे दिख जाएं तो काफी शुभ माना जाता है। चलते चलते मै काफी थक गया था और भूख भी लग रही थी मैने यहां के छोटी मोटू दुकान में नाश्ता कर लिया। खाना काफी स्वादिष्ट था और व्यवस्था भी अच्छी थी अगर आपको थाली चाहिए होगा तो बगल में ही लक्ष्मी होटल भी है।
बीकानेर घूमने का टाइम नवंबर से फरवरी का होता है जनवरी में यहां कैमल फेस्टिवल भी लगता है और तब जाना सबसे अच्छा होता है बाकी समय यहां काफी गर्मी होती है। बीकानेर में जब आप यहां आते हो तो सबसे पहले आप रामपुरिया हवेली जाओ अगल बगल आपको लाल लाल इमारत दिखाई देगा लोग यहां आते है फोटो खिंचवाते है।
यही से एक किलोमीटर दूर भांडाशाहजी का मंदिर है जो जैन टेंपल है और काफी ऐतिहासिक भी है जो लगभग 500 साल पुराना है और इनकी नींव की जगह में पानी के जगह घी का इस्तेमाल किया गया है मंदिर के अंदर अनेकों नक्काशियों से भरा पड़ा है और इसी मंदिर के बगल में लक्ष्मीनाथ का मंदिर है बीकानेर स्टेशन से आपको प्लेट फॉर्म नंबर 1 से निकलना चाहिए क्योंकि यही से आपको ढेर सारी होटल देखने को मिलेगी मैने आगे ही एक होटल लिया था जिसमें मुझे ₹1500 रुपए लगे प्रत्येक दिन के।
बीकानेर से लगभग 8 किलोमीटर दूर सागर छतरी भी पड़ता है और ये स्थान भी आपको पसंद आएगी यहां पर जितने भी पड़े पड़े गुम्मद जैसे आपको दिखेंगे वो सब राजाओं के कबरे है और जो चकोर टाइप के होंगे वो उनके बच्चे जो पैदा होने के बाद मृत्यु हो गई थी।
अब मैं आपको बताता हु यहां घूमने के लिए कितने दिन और रात चाहिए देखिए अगर आपको अच्छे से घूमना है तो दो दिन आपके लिए सही है। सबसे पहले आप
1. गुनगढ फोर्ट
2. भण्डाशाहनाथ मंदिर
3. लक्ष्मीनाथ मंदिर
4. उसके बाद आप खाना पीना
दूसरे दिन
1. चाय पट्टी
2. रामपुरिया हवेली
3. करनिमाता मंदिर
4. सागर छतरी
5. और फिर भुजिया का स्वाद तो लेना ही पड़ेगा।
कितना खर्चा होगा?
होटल ₹1500
खाने पीने में ₹800
ट्रांसपोर्टेशन ₹800
मतलब आप 3 हजार में ही आप पूरे बिकने घूम सकते है तो दोस्तो ये जानकारी आपको कैसी लगी आपको पसंद आया तो हमें फॉलो करना
न भूले मिलते है अगले पोस्ट में अभी के लिए धन्यवाद।






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