कौसानी में 1 दिन घूमने का खर्च 2026: होटल, धर्मशाला, खाना और ट्रांसपोर्ट का पूरा बजट


कौसानी उत्तराखंड का खूबसूरत हिल स्टेशन


 हिम शिखरों की छाँव में, बसा प्रकृति का मान।

कौसानी की वादियाँ, करती मन का गान॥

सूरज जब मुस्काए यहाँ, स्वर्णिम हो आकाश।

कौसानी की हर सुबह, भर दे मन में प्रकाश॥

देवदार की खुशबुओं, संग बहती शीतल बयार।

कौसानी की गोद में, मिलता सुकून अपार॥


कौसानी उत्तराखंड में स्थित है यहां आप केवल 2 साधनों से आ सकते है पहला प्राइवेट टैक्सी और दूसरा बस, अगर आप बस से आते है तो लडवानी, नैनीताल और अल्मोड़ा होते हुए यहां आ सकते हैं हल्द्वानी से आप ₹400 रुपए देकर बस से डायरेक्ट आ सकते हैं जिसमें 8 से 10 घंटे का सफर रहता है।


पास का रेलवे स्टेशन काठकोदम का है जोकि 135 किलोमीटर दूर है और एयरपोर्ट पंतनगर और देहरादून का है 


मैने अपनी जर्नी सुबह सुबह शुरू की 8 बजे से अल्मोड़ा से कौसानी के लिए और इसकी दूरी 50 किलोमीटर पड़ती है और मुझे पहुंचने में 2 से 3 घंटे लगे। बीच बीच में रुक कर जा रहा था क्योंकि खूबसूरत नजारा पीछे कैसे छोड़ सकता हूं और पैसे खर्च हो रहे हैं तो मजे भी भरपूर होना चाहिए।


कौसानी जाने का रास्ता बेहद खूबसूरत था रास्ते में आपको खूबसूरत घाटियां और सांप की तरह रास्ते देखने को मिलेंगे जैसे ही आप आगे के तरफ बढ़ते है आपको तिराहा दिखाई देता है जिसमें एक रास्ता कौसानी तो दूसरा कटारमल सूर्यमंदिर।

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कौसानी से हिमालय पर्वत का दृश्य


कटारमल सूर्यमंदिर – Katarmal Sun Temple


कटारमल सूर्य मंदिर उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में पड़ता है। ऐतिहासिक और धार्मिक दोनों में इसका महत्व है इस मंदिर को भारत का सबसे पुराना सूर्य मंदिर माना जाता है इसकी स्थापना लगभग 9वीं शताब्दी के बीच माना जाता है कत्यूरी वंश के राजा कटारमल द्वारा निर्माण कराया गया था जिसकी वजह से इस मंदिर का नाम कटारमल पड़ा।


कटारमल सूर्य देव के उपासक से इसलिए उन्होंने सूर्य मंदिर बनवाया था। हमारे 10वीं क्लास के बच्चों को इसके बारे में पढ़ाया जाता है। मंदिर की वास्तुकला नागर लिपि में लिखी गई है वैसे तो ये मंदिर सूर्य देव को समर्पित है लेकिन इसके चारों और 40 और छोटे छोटे मंदिर बने हुए हैं जिसमें ब्रह्मा, बिष्णु, महेश और अन्य देवी देवदाताओं के मंदिर बने हुए है।


जिस समय मैं यहां पहुंचा था उस समय ज्यादा लोगों की भीड़ नहीं थीं स्थानीय लोग आते हैं लेकिन विशेष अवसरों में पूजा करने के लिए। यहां आने का सबसे बेस्ट टाइम मार्च से जून का माना जाता है यहां पहुंचना भी बेहद आसान है अल्मोड़ा से 17 किलोमीटर की डिस्टेंस पर पड़ता है जिसमें आपको 25 से 30 मिनट लगेंगे और ट्रैफिक की कोई झंझट भी नहीं है। 


कटारमल से मै वापस कौसानी के लिए निकल गया था जिसका शुरुवाती रास्ता तो अच्छा था लेकिन अगले 2 से 3 किलोमीटर की रोड की कंडीशन खराब थी अल्मोड़ा से कौसानी के बीच खाने पीने की व्यवस्था बहुत कम है इसलिए आपको पहले से ही नाश्ते और कुछ फल लेकर कैरी करना जरुरी है। मैने पहले स्नैक्स नहीं रखे थे तो जो छोटे मोटे खाने के दुकानें थी उसी से मुझे काम चलाना पड़ा।


मुझे कौसानी पहुंचने में पांच घंटे लग गये वैसे तो आप 2 से 3 घंटे में पहुंच जाएंगे लेकिन मै पहले सूर्यमंदिर गया फिर बीच बीच में खूबसूरत नजरों का लुफ्त उठाते उठाते इतना टाइम तो लग ही जाता है। जिस तरह अपने फोटोज में कौसानी के सुंदर सुंदर व्यू देखे होंगे बिल्कुल वैसा ही अपको यहां की खूबसूरत नजारा देखने को मिलेगा।

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कौसानी की प्राकृतिक सुंदरता


रुद्रधारी वॉटरफॉल 


इसके बाद मै रुद्रधारी वॉटरफॉल के लिए निकल गया था जोकि मेन कौसानी से 12 किलोमीटर की डिस्टेंस पर पड़ता है रुद्रधारी वॉटरफॉल जाने का शुरुवाती रास्ता अच्छा था लेकिन जैसे जैसे मै आगे बढ़ रहा था वैसे वैसे रस्ते खराब होते जा रहे थे पर ये रस्ते छोटे छोटे गांव से होते हुए जाते है जो बहुत ही प्यारे लग रहे थे और बहुत जल्द ही मै रुद्रधारी वॉटरफॉल ट्रैकिंग पॉइंट तक पहुंच गया था 


रुद्रधारी वॉटरफॉल तक जाने के लिए आपको 1 से 2 किलोमीटर की ट्रैकिंग करनी पड़ेगी रास्ते थोड़े हार्ड थे इसलिए आपको धीरे धीरे कदम आगे के तरफ बढ़ाना चाहिए वॉटरफॉल तक पहुंचने में मुझे 40 मिनट का समय लगा आप चाहे तो गाइडेंस ट्रिप कर सकते है ₹300 रुपए का चार्ज देकर।

कटारमल सूर्य मंदिर कौसानी उत्तराखंड


सुमित्रानंदन पंत म्यूजियम 


कौसानी से वापस आकर थोड़ी देर आराम करके और भूख भी लगी थी तो ₹150 रुपए रोटी और आलू की सब्जी खाली। यहां पर आपको लिमिटेड सब्जी ही मिलेगी इसलिए कुछ चटपटा स्नैक्स आपके पास होना चाहिए।


यही पर सुमित्रानंदन पंत जी का जन्म हुआ था इनके घर के बैक साइड में म्यूजियम भी है जिसमें उनके कपड़े उन्होने कौन की पुस्तक की रचना की थी और जिन भी पुस्तक को उन्होंने पढ़ा था उसकी पूरी कलेक्शन देखने को मिलेगी साथ ही उनके जीवन की कुछ महत्वपूर्ण तस्वीरें भी यहां पर लगी हुई दिखेगी।


गांधी जी ने कौसानी में काफी समय बिताया था और यहां पर अनासक्ति आश्रम है जिसे गांधी आश्रम भी कहते हैं क्योंकि इसका निर्माण महात्मा गांधी के आधार में किया गया था गांधी जी यहां पर 1929 को यहां आए थे और उन्होंने कौसानी को भारत का स्विजरलैंड भी कहा था। 


बैजनाथ मंदिर 


बैजनाथ मंदिर उत्तराखण्ड के बाघेवर जिले में गोमती नदी के किनारे स्थित है ये मंदिर भगवान शिव को समर्पित है कौसानी से 17 किलोमीटर दूर पड़ता है जिस समय मैं गया था उस समय कोई भी व्यक्ति दिखाई नहीं दिया लेकिन जो भी टूरिस्ट कौसानी घूमने आते हैं वो बैजनाथ मंदिर अवश्य आते है 


बैजनाथ मंदिर का निर्माण 12वीं–13वीं शताब्दी के दौरान कत्यूरी राजाओं द्वारा कराया गया था यहां पर बहुत सारे छोटे बड़े मंदिर है शायद उस समय के समृद्ध संस्कृति को दर्शाते है मंदिर के सामने बहती गोमती नदी मंदिर की खुसूरत और बड़ा देती है।

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स्टे करने के लिए बेस्ट होटल या धर्मशाला 


अगर आप लो बजट में ट्रेवल करना चाहते है तो मैं कहूंगा कि आप धर्मशाला में स्टे करे क्योंकि यहां पर आपको ₹300 से ₹700 में अच्छे रूम मिल जाएंगे। अगर आप होटल में रूम लेते है ₹1000 से ₹1500 रुपए लगेंगे। ऑफ सीजन में इतने मिल जाएगी लेकिन सीजन में इससे थोड़े महंगे हो जाते है मैने ऑफ सीजन में होटल लिया था जोकि मुझे ₹1000 रुपए का पड़ा था।

कौसानी में 1 दिन घूमने का खर्च (2026)

यदि आप कौसानी की एक दिन की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो नीचे दिया गया खर्च अनुमान आपके बजट को समझने में मदद करेगा।

खर्च की श्रेणी अनुमानित खर्च (₹)
खाने-पीने का खर्च ₹500
स्थानीय ट्रांसपोर्टेशन ₹2000 ( Scooty)
बजट होटल (1 रात) ₹1,000
धर्मशाला (1 रात) ₹400

कौसानी यात्रा का कुल अनुमानित बजट

यात्रा का प्रकार कुल खर्च (₹)
धर्मशाला + भोजन + ट्रांसपोर्ट ₹1,900
होटल + भोजन + ट्रांसपोर्ट ₹3,000

नोट: यह एक अनुमानित बजट है। सीजन, होटल की श्रेणी और आपकी यात्रा शैली के अनुसार खर्च कम या अधिक हो सकता है।

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